16 फ़रवरी 2020 - 18:57
सीरिया के हसका प्रांत में क्या हो रहा है? क्या पूर्वी फ़ुरात के इलाक़े से अमरीकियों को मार भगाने के लिए जन प्रतिरोध की शुरूआत हो

इस समय वैसे तो सारी निगाहें पश्चिमोत्तरी सीरिया के इदलिब इलाक़े पर केन्द्रित हैं जहां सीरियाई सेना लगातार प्रगति कर रही है और दर्जनों गावों और बड़े शहरों को चरमपंथियों के क़ब्ज़े से आज़ाद करा चुकी है।

उसने हलब दमिश्क़ राजमार्ग भी कई साल तक बंद रहने के बाद खोल दिया है। दूसरी ओर तुर्की इस इलाक़े में अपनी सैनिक पोज़ीशनें मज़बूत कर रहा है। स्थिति यह है कि सीरिया और तुर्की के बीच युद्ध शुरू हो जाने की आशंका जताई जाने लगी है। लेकिन इस बीच पूर्वोत्तरी सीरिया में जो घटनाएं हुई हैं उनका महत्व किसी भी तरह कम नहीं है। विशेष रूप से सीरियाई सेना से जुड़े संगठनों और अमरीकी सैनिक गश्ती दल के बीच टकराव की जो घटनाएं हुईं वह बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस टकराव में दो अमरीकी सैनिक घायल हुए और एक सीरियाई सैनिक मारा गया।

यह पिछले नौ साल से जारी संकट के दौरान बिल्कुल अलग प्रकार की घटना है।

हसका के इलाक़े में अमरीकी सेना की गश्ती टीम का रास्ता रोकना और उससे टकरा जाना दमिश्क़ में सैनिक व सिविल नेतृत्व के स्पष्ट दिशानिर्देश के बाद ही संभव है जिसका मतलब यह है कि इस इलाक़े में मौजूद अमरीकी सैनिकों को मार भगाने के लिए जन प्रतिरोध का रास्ता अपनाने की रणनीति का फ़ैसला किया जा चुका है।

इस विचार की पुष्टि इस बात से भी होती है कि ठीक इसी समय क़ामेशली के इलाक़े में भी सीरियाई सेना के समर्थकों और अमरीकी सैनिक गश्ती टीम के बीच झड़प हुई जिसमें 14 साल के एक बच्चे की मौत हो गई। रिपोर्टें मिल रही हैं कि अमरीकी सैनिक गश्ती टीमों के ख़िलाफ़ कार्यवाही के लिए भरपूर तैयारी की जा रही है।

उत्तरी और पूर्वी सीरिया में अमरीकी सैनिकों के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलना शायद इस समय हैरत की बात लगे क्योंकि अभी तो इदलिब प्रांत का मोर्चा गर्म है और वहां सीरियाई और तुर्क सेना के बीच युद्ध शुरू हो जाने की आशंका बनी हुई है। लेकिन सीरियाई सरकार से क़रीब लेबनानी सूत्रों का कहना है कि सीरियाई और तुर्क सेना के बीच युद्ध की चिंता बहुत अधिक नहीं है क्योंकि रूस ने भी घोषणा कर दी है कि इदलिब में चरमपंथियों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा यानी यह इलाक़ा आज़ाद होकर रहेगा।

उत्तरी और पूर्वी इलाक़ों में अमरीकी सेना अपनी उपस्थिति बढ़ा रही है और उसने इस इलाक़े में मौजूद तेल और गैस के भंडारों पर अपना नियंत्रण मज़बूत करके खुले आम लूट शुरू कर दी है। अमरीका इन भंडारों को सीरियाई सरकार के नियंत्रण में नहीं जाने देना चाहता ताकि वह देश का पुनरनिर्माण न कर सके। इसी लिए अमरीका इस इलाक़े में स्थायी सैनिक छावनी बनाने की कोशिश में भी है।

दो महीना पहले सीरियाई राष्ट्रपति बश्शार असद ने रशा टुडे के साथ साक्षात्कार में कहा था कि अमरीका का मुक़ाबला सीरियाई सेना से नहीं बल्कि हथियारबंद प्रतिरोध से किया जा सकता है। लगता है कि इसी रणनीति पर अमल करने का समय अब आ गया है। क्योंकि सीमा के उस पार इराक़ में भी अमरीकी सेना के ख़िलाफ़ इसी प्रकार का प्रतिरोध शुरू हो चुका है।

सीरियाई लोगों के पास दुशमन का थका मारने का लंबा अनुभव है जो उन्होंने इराक़ में अमरीकी सैनिकों के खिलाफ़ और लेबनान व फ़िलिस्तीन में इस्राईली सेना के ख़िलाफ़ वर्षों तक जारी रहने वाले प्रतिरोध से हासिल किया है। इन अनुभवों में हलिया सीरिया संकट के दौरान नई धार पैदा हो गई है।

अब्दुल बारी अतवान

अरब दुनिया के जाने माने टीकाकार